Help talk:Introduction to referencing with Wiki Markup/1: Difference between revisions

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:::{{u|DESiegel}}, I saw the Teahouse thread after I replied. Since the editor mentioned {{tq|new to ''active'' editing}}, I assume they must have an account that's older than April 2014, which seems like a very rare situation, but I guess if they're asking about it it happens. How about we link to [[Wikipedia:RefToolbar]] over "RefToolbar"? That will provide an option for the (presumably very few) editors experiencing issues to more easily troubleshoot without cluttering things for the majority who don't need the fine print. <span style="color:#AAA"><small>&#123;{u&#124;</small><span style="border-radius:9em;padding:0 5px;background:#088">[[User:Sdkb|<span style="color:#FFF">'''Sdkb'''</span>]]</span><small>}&#125;</small></span> <sup>[[User talk:Sdkb|'''talk''']]</sup> 16:12, 25 July 2020 (UTC)
:::{{ec}}I initially thought [https://en.wikipedia.org/w/index.php?title=Help:Introduction_to_referencing_with_Wiki_Markup/3&type=revision&diff=969356309&oldid=961721355&diffmode=source your edit yesterday] was a sound one, {{u|DESiegel}}, and worthy of a further tweak by me, but I now also appreciate that RefToolbar has actually been activated by default [https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Village_pump_(proposals)/Archive_68#Proposal_-_Turn_on_RefTools_gadget_by_default since early 2011]. The discussion [https://en.wikipedia.org/wiki/Wikipedia:Teahouse#Why_doesn't_my_edit_box_include_a_%22cite%22_menu? yesterday at the Teahouse] which initiated this change now seems to me to have been sufficiently unusual ''not'' to warrant a specific mention here that RefToolbar can be turned on/off in Preferences>Gadgets. If new users since 2011 have it by default, do we really need to tell everyone about activating it in this Help section? Yes, the questioner who didn't have the Cite button began here in 2009 (so maybe that was why they didn't have a 'Cite' button visible whilst editing, or they'd simply turned it off without appreciating its purpose) but I think most long-standing editors should either know enough to investigate Preferences to find tools for themselves, or know how to ask at a help forum, as that one did. Even just adding ''"'RefToolbar' can be disabled in your [[Special:Preferences#mw-prefsection-gadgets|Preferences]] settings"'' would seem rather unnecessary. (Just to note that I've since made [https://en.wikipedia.org/w/index.php?title=Help:Introduction_to_referencing_with_Wiki_Markup/3&type=revision&diff=969466017&oldid=969374394&diffmode=source some further tweaks] to add clarity and to this page, including a mention of 'Preview' which I suspect is of more value to most readers) I also think Sdkb's (edit conflicted) suggestion above of linking to RefToolbar is a good way to point to "turning it off and on again". [[User:Nick Moyes|Nick Moyes]] ([[User talk:Nick Moyes|talk]]) 16:29, 25 July 2020 (UTC)      
 
== Santosh Pandey M.L.A ==
 
{{edit semi-protected|Help:Introduction to referencing with Wiki Markup/1|answered=no}}
[[User:ADEKIA|ADEKIA]] ([[User talk:ADEKIA|talk]]) 14:55, 27 July 2020 (UTC)
 
जीवनी
संतोष पाण्डेय उत्तर प्रदेश के जनपद सुलतानपुर के ऐसे धुरंधर नेता के रूप में जाने जाते है, जिन्होने एक साधारण गांव से निकलकर आज पूरे प्रदेश की सियासत में एक बड़ी पहचान बनाई है। वह 2012 में लम्भुआ से सोलवहीं विधानसभा के सदस्य के रूप में सेवा दे चुके हैं। 26 नवम्बर 1975 को सुलतानपुर जिले के एक गांव भदैंया में पैदा होने वाले संतोष पाण्डेय ने राजनीति की शुरूआत अपने बडे़ भाई अनिल पाण्डेय जी के साथ की। जो कि 2002 विधानसभा में चांदा विधानसभा से विधायक भी रहे। उनके बाद 2012 में वे स्वयं विधानसभा लम्भुआ से विधायक बनें। जनपद सुलतानपुर में समाजवादी पार्टी को मजबूती प्रदान करने में इनका सर्वागीण योगदान रहा है। संतोष पाण्डेय का जन्म जमींदार परिवार में हुआ। इनके पिताजी श्री रामचन्द्र पाण्डेय का ईट भट्ठों का बडा कारोबार था। इनकी माताजी श्रीमती सुमित्रा पाण्डेय अत्यन्त ही सात्विक विचारधारा से ओत-प्रोत हैं। उनकी भगवान के प्रति आस्था की क्षेत्र के लोग मिशाल देते है। संतोष पाण्डेय जब से जनपद सुलतानपुर में समाजवादी पार्टी की राजनीति में सक्रिय हुए वहां पार्टी का कार्य अपने आप एक नई दिशा की तरफ जाने लगा। संतोष पाण्डेय की माताजी आध्यात्मिक होने के साथ साथ 3 बार ब्लाक प्रमुख भी रही। पूर्व विधायक होने के बाद संतोष पाण्डेय ने अपने कदम को आगे बढाया और उन्होने अपने ब्राह्मण समाज का बीडा उठा लिया। वर्तमान समय में भगवान परशुराम चेतना पीठ का गठन कर ब्राह्मणों को एकजुट करने व गरीबांे की मदद करने के लिए आगे आए है। लखनऊ में भगवान परशुराम जी की 108 फिट की कांस्य की प्रतिमा लगाने का विचार बनाया और इस मिशन के लिए निरंतर आगे बढ रहे है।
 
व्यक्तिगत जीवन
संतोष पाण्डेय का जन्म 25 नवम्बर 1975 को जनपद सुलतानपुर के विधानसभा लम्भुआ के भदैयां गांव में हुआ था। इनके पिताजी श्रीराम चन्द्र पाण्डेय व माताजी का नाम सुमित्रा पाण्डेय है। संतोष पाण्डेय तीन भाई थे। बडे़ भाई का नाम अनिल पाण्डेय जो कि 2002 में चांदा विधानसभा से विधायक रह चुके है और छोटे भाई मनोज पाण्डेय था जिनका दिनांक 12.03.2020 को आकस्मिक निधन हो गया। संतोष पाण्डेय के दो पुत्र एवं एक पुत्री है। पुत्री का नाम सृष्टि व बेटों का नाम क्रमशः स्वास्तिक पाण्डेय, सृजन पाण्डेय है।
 
राजनीतिक जीवन
 
संतोष पाण्डेय ने अपनी राजनीति की शुरूआत अपने बडे भाई अनिल पाण्डेय के पदचिन्हांे पर आरम्भ की। 2002 में इनके बडे भाई अनिल पाण्डेय के विधायक होने के बाद संतोष पाण्डेय की समाज सेवा करने की दिलचस्पी ने इन्हे राजनीति के मैदान में उतार दिया। 2012 में समाजवादी पार्टी ने इन पर भरोसा दिखाया और 8 बार टिकट काटने के बाद इन्हे 190 लम्भुआ विधानसभा से अपना उम्मीदवार बनाया। पार्टी के भरोसे पर संतोष पाण्डेय खरे उतरे और 74352 वोट पाकर अपने प्रतिद्वंदी इंदिरा गांधी सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे श्री केदार नाथ सिंह के बेटे विनोद सिंह जो कि बसपा सरकार में मंत्री रहे को 17372 वोटों से हाराया। विधायक होने के बाद संतोष पाण्डेय ने जिले में हर पद पर समाजवादियों का परचम लहराना प्रारम्भ किया। वर्तमान समय में विधायक जयसिंहपुर श्री सीताराम वर्मा (जो कि उस समय जिला पंचायत अध्यक्ष थे) को हटाकर पृथ्वीपाल यादव जो कि पार्टी के साधारण कार्यकर्ता थे, उन्हे जिला पंचायत अध्यक्ष बनाया। इसी क्रम में संतोष पाण्डेय ने ब्लाक प्रमुखी के चुनाव में अपनी विधानसभा की तीनों सीटों को निर्विरोध कराकर एक नई मिशाल पेश की जो कभी जनपद सुलतानपुर में कभी भी नहीं हुई थी। एक बार फिर 2015 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में पार्टी ने संतोष पाण्डेय को एक बडी जिम्मेदारी सौंपी और उन्हे इस चुनाव का प्रभारी बना दिया। संतोष पाण्डेय पार्टी की जिम्मेदारी को बडी ही कर्मठता के साथ निभाते हुए अपने प्रिय छोटे भाई जैसे यशभद्र सिंह मोनू को बडी पटकनी देते हुए पार्टी के प्रत्याशी शिवकुमार सिंह को चुनाव जितवाया। इस चुनाव के बाद संतोष पाण्डेय जनपद सुलतानपुर में किंगमेकर की भूमिका मंे आ गये। संतोष पाण्डेय का मिशन फतेह का काफिला यहीं नही रूका उन्होने एम.एल.सी. चुनाव 2016 में समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी बनाए गये जिले के कद्ावर नेता श्री शैलेन्द्र प्रताप सिंह को भी जितवा कर पार्टी को मजबूती प्रदान किया। वर्तमान में 2017 के विधानसभा चुनाव में हार के बाद संतोष पाण्डेय ने अपने समाज की सेवा करने का बीड़ा उठा लिया। लखनऊ में भगवान परशुराम चेतना पीठ का गठन कर संतोष पाण्डेय हर गरीब, मजलूम की आवाज बन कर उठ रहे है। संतोष पाण्डेय ने भगवान परशुराम जी की 108 फिट कांस्य की प्रतिमा लगाने का मन बनाया और इस मिशन को वर्तमान समय में तीव्रता देते हुए आगे बढ़ रहे हैं।
 
सामाजिक गतिविधियां
 
संतोष पाण्डेय राजनीति के पहले चरण से हर वर्ग के लोगांे के चहेते अपनी कार्यशैली की वजह से होते चले गये। संतोष पाण्डेय अपने क्षेत्र के हर गरीब की आवाज बनकर समाज में एक बडे नेता के रूप में उभरे। संतोष पाण्डेय की अपने कार्यकर्ताओं के प्रति लगाव को देखकर जनपद के अन्य नेंता अत्यंत परेशान रहते है। संतोष पाण्डेय ने अपने कार्यकाल में गरीब कन्याआंे का विवाह करवाया। संतोष पाण्डेय ने गरीब महिलाओं, बुजुर्गों, युवाओं सभी को वस्त्र, शाल, व ट्रैकसूट, खेल के उपकरण प्रदान करते रहते हैं। संतोष पाण्डेय हर त्योहार पर अपने क्षेत्र के गरीब वर्ग की मदद के लिए आगे आते हैं और उनकी मदद करते रहते हैं। संतोष पाण्डेय ने क्षेत्र के हर वर्ग अध्यापक, आशाबहुआंे, प्रधानों जनप्रतिधियों, पुरोहितों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों का वस्त्र व स्मृति चिन्ह भेंट कर हमेशा सम्मान बढाते रहते है। संतोष पाण्डेय ने आज भी 108 गरीब कन्याओं के पूरी शिक्षा का कार्यभार देखते है।
 
धार्मिक गतिविधियां
 
संतोष पाण्डेय ने सामाजिक कार्य के साथ-साथ अत्यंत ही धार्मिक है। संतोष पाण्डेय ने अपनी माताजी को धार्मिक आदर्श मानते हुए आज भी उनके हर सलाह पर कार्य करते है। संतोष पाण्डेय ने विधानसभा लम्भुआ में विशाल श्रीमद्भागवत कथा अन्तर्राष्ट्रीय संत स्वामी चिन्मयानंद बापू जी के श्रीमुख से जनता को रसास्वादन करवाया। इन विशाल श्रीमद्भागवत कथा को जनता ने आस्था चैनल के माध्यम से पूरे विश्व से सुना। संतोष पाण्डेय ने स्वामी रामदेव को अपने विधानसभा में लाकर जनता को ऐसे संत के विचारों का रसपान करवाया। संतोष पाण्डेय ने 11000 ब्राह्मणों का का वैदिक रीतियों के अनुसार भोजन करवाया। जिनमें सभी ब्राह्मणों को जनेऊ, चंदन से स्वागत किया गया व प्रसादोपरान्त वस्त्र व दक्षिणा भेंट की गयी। इन्होने 11000 महिलाओं को मां दुखदुरिया की पूजा करवाकर प्रसाद ग्रहण करवाया। संतोष पाण्डेय ने सभी वर्ग की 101-101 कन्याओं का विवाह पूरी रीति रिवाज के साथ सम्पन्न करवाया है। संतोष पाण्डेय हर धार्मिक कार्यक्रम में चाहे ही वह जिस धर्म का हो पूरी तरह से अपनी आर्थिक व सामाजिक उपस्थिति दर्ज कराने में सबसे अग्रणी रहते हैं।