कहानी: बारिश की रातों का रहस्य

edit
लेखक: कुशल कुमार झा

अध्याय 1: अजनबी का आगमन

रात का अंधेरा गहराता जा रहा था। आसमान में बादल गरज रहे थे, बिजली रह-रहकर चमक रही थी और बारिश मानो धरती को चीरने की कोशिश कर रही थी। ऐसी ही एक डरावनी रात में कुशाल, जो शहर का एक नौजवान था, अपनी पुरानी मोटरबाइक पर गांव की ओर बढ़ रहा था। उसके चारों ओर जंगल फैला था, और रास्ता बिल्कुल वीरान था। उसे यहां आए कुछ ही घंटे हुए थे, पर इस अजनबी गांव की खामोशी में एक भयानक सन्नाटा था, जो उसकी नसों में सिहरन पैदा कर रहा था।

कुशाल का शहर से इस गांव में आने का मकसद बेहद गंभीर था। इस गांव में पिछले कुछ हफ्तों से अजीब घटनाएं हो रही थीं। हर रात कोई न कोई आदमी गायब हो जाता था, और वो कभी वापस नहीं आता था। गांववालों के बीच यह अफवाह फैल चुकी थी कि कोई अनदेखी शक्ति, कोई आत्मा, हर रात एक इंसान को अपना शिकार बना रही है। कुशाल अपने दोस्त राहुल के साथ इस रहस्य का पर्दाफाश करने आया था। लेकिन उसे अंदाज़ा नहीं था कि उसकी अपनी जिंदगी इस गांव की भयावह घटनाओं से गहराई से जुड़ी हुई थी।


अध्याय 2: अंधेरे के साए

रात के घने साए ने पूरे गांव को ढक लिया था। हवाओं की सरसराहट और बारिश की तेज बौछारों ने गांव को और भी खौफनाक बना दिया। कुशाल और राहुल गांव के प्रमुख से मिलने गए। प्रमुख ने कांपते हुए कहा, “हर रात कोई न कोई आदमी गायब हो जाता है, और उसके बाद उसका कोई सुराग नहीं मिलता। लोग डर के मारे घरों से बाहर नहीं निकलते।”

गांव में डर का माहौल इतना बढ़ चुका था कि लोग घरों के दरवाज़े और खिड़कियां बंद कर बैठते थे। कोई भी रात में बाहर निकलने की हिम्मत नहीं करता था। लेकिन कुशाल और राहुल ने ठान लिया था कि वे इस रहस्य को सुलझाएंगे, चाहे इसके लिए उन्हें कुछ भी करना पड़े। कुशाल की परेशानी सिर्फ गायब होते लोगों तक सीमित नहीं थी। उसकी गर्लफ्रेंड आहना, जो इसी गांव की रहने वाली थी, कई दिनों से उससे मिल नहीं पाई थी। आहना एक शांत और रहस्यमयी लड़की थी, जिसने कुशाल के दिल में अपना घर बना लिया था।

लेकिन अब जब कुशाल इस गांव में था, उसके मन में आहना के बारे में अजीब से सवाल उठने लगे थे। कुछ ऐसा था, जो उसे खुद भी समझ नहीं आ रहा था।


अध्याय 3: हवेली का रहस्य

एक रात, कुशाल और राहुल ने गांव के सबसे पुराने और खौफनाक माने जाने वाले स्थान का दौरा करने का निर्णय लिया - पुरानी हवेली। कहा जाता था कि वह हवेली भूतों का डेरा है, और वहीं से गांव में अनहोनी घटनाओं की शुरुआत हुई थी।

हवेली में घुसते ही एक अजीब सी ठंडक ने दोनों को घेर लिया। अंदर का माहौल दमघोंटू था, जैसे सदियों से यहां कुछ छिपा हुआ था। दीवारों पर पुरानी तस्वीरें टंगी थीं, जिनमें गांव के पूर्वजों की छवियां दिखाई दे रही थीं। लेकिन एक तस्वीर ने कुशाल के पैरों तले से ज़मीन खींच ली — वह तस्वीर उसकी गर्लफ्रेंड आहना की थी, लेकिन तस्वीर सदियों पुरानी लग रही थी।

“ये कैसे हो सकता है?” कुशाल ने खुद से बुदबुदाया। राहुल ने भी यह देखा और उसकी आंखें चौड़ी हो गईं। आहना की तस्वीर इस पुरानी हवेली में क्यों थी? क्या आहना का इस गांव के रहस्यों से कोई संबंध था?


अध्याय 4: रहस्य की परतें

कुशाल ने अगली सुबह आहना से मिलने का निर्णय किया। बारिश का सिलसिला थमा नहीं था, लेकिन कुशाल किसी भी कीमत पर आहना से सच जानना चाहता था। वह गांव के पुराने मंदिर की ओर बढ़ा, जहां आहना अक्सर जाया करती थी। वहां पहुंचते ही उसने देखा कि आहना सीढ़ियों पर खड़ी थी, उसकी आंखों में अजीब सी चमक थी।

कुशाल ने बिना कोई भूमिका बांधे सीधे पूछा, “आहना, ये सब क्या हो रहा है? लोग गायब क्यों हो रहे हैं? और तुम्हारी तस्वीर सदियों पुरानी हवेली में क्यों है?”

आहना की आंखें थोड़ी नर्म हुईं। उसने एक गहरी सांस ली और दर्द भरी आवाज़ में बोली, “कुशाल, मैं वो नहीं हूं जो तुम समझते हो। सालों पहले, इस गांव ने मेरे साथ बहुत बुरा किया था। उन्होंने मुझे मारा, मुझे ज़िंदा जला दिया। मेरे साथ हुआ अन्याय इतना बड़ा था कि मैं मरकर भी चैन नहीं पा सकी। अब मैं हर रात इस गांव से अपना बदला ले रही हूं। मैं हर रात एक आदमी की जान लेती हूं।”

कुशाल और राहुल की रूह कांप गई। उन्हें समझ में नहीं आ रहा था कि यह सब क्या हो रहा है। क्या सच में आहना वह आत्मा थी जो गांववालों को मार रही थी?


अध्याय 5: बुराई का जाल

कुशाल और राहुल ने अपने साहस को इकट्ठा करके इस भयानक सच्चाई का सामना किया। उन्होंने सोचा था कि वे आहना को समझा लेंगे, लेकिन आहना ने उन्हें अपने ही जाल में फंसा लिया। मंदिर के चारों ओर एक घना अंधकार छा गया, और आहना अब उनके सामने अपने भूतिया रूप में थी। उसकी आंखों में जलती हुई आग थी और उसके होंठों पर ठंडी हंसी थी, जो कुशाल और राहुल के दिल में दहशत पैदा कर रही थी।

"तुम दोनों अब मेरे जाल में हो," आहना ने खामोश और भयानक स्वर में कहा। "अब कोई भी यहां से बचकर नहीं जा पाएगा।"

कुशाल और राहुल बुरी तरह से फंस चुके थे। मंदिर की सीढ़ियां जैसे एक अंतहीन गहराई में समा रही थीं, और वे दोनों समझ नहीं पा रहे थे कि यहां से बाहर कैसे निकला जाए।



अध्याय 6: आखिरी मौका

किसी तरह कुशाल और राहुल ने अपनी सारी ताकत इकट्ठी की और आहना के चक्रव्यूह से बाहर निकलने में कामयाब हुए। वे भागते हुए गांववालों के पास पहुंचे और उन्हें आहना की सच्चाई बताई। गांववालों का चेहरा डर और शर्म से सफेद पड़ गया। यह वही आहना थी जिसे उन्होंने अन्यायपूर्ण तरीके से मारा था।

गांववालों ने महसूस किया कि वे आहना से माफी मांगने और उसकी आत्मा को शांति दिलाने के लिए कुछ कर सकते हैं। उन्होंने एक विशेष पूजा का आयोजन किया। गांव के पुजारी ने प्रार्थनाएं कीं और गांववालों ने आहना से उसके प्रति किए गए अत्याचारों के लिए माफी मांगी।

कुछ दिनों तक सब कुछ शांत रहा। ऐसा लग रहा था कि आहना की आत्मा अब शांति पा चुकी थी, और गांव पर मंडराता हुआ साया छंट गया था। लेकिन शांति कभी स्थायी नहीं होती, विशेषकर जब बात आत्माओं की हो।


अध्याय 7: अंतिम रात

कुशाल और राहुल को लगा कि अब सब कुछ ठीक हो गया है। लेकिन एक रात फिर से बारिश शुरू हो गई। हवाएं पहले से ज्यादा तेज़ चलने लगीं, और बिजली की चमक ने आसमान को चीर दिया। गांव में एक बार फिर डर का माहौल बन गया।

उस रात कुशाल और राहुल दोनों अचानक गायब हो गए। गांववाले सुबह उठे तो उन्होंने देखा कि कुशाल और राहुल का कोई अता-पता नहीं था। किसी ने उन्हें आखिरी बार उस रात बारिश में बाहर जाते हुए देखा था, लेकिन उसके बाद उन्हें कोई नहीं देख पाया।

गांववालों ने सोचा कि शायद आहना की आत्मा ने एक आखिरी बार अपना बदला लिया था।


अंत: अनसुलझे सवाल

कुशाल और राहुल की कहानी उसी बारिश में खो गई, जहां से यह शुरू हुई थी। क्या आहना की आत्मा सच में शांति पा चुकी थी, या फिर वह अब भी उन अंधेरों में छिपी थी, जो केवल कुछ चुने हुए को ही देख पाते थे?  कोई नहीं जानता।..







THANKS FOR YOUR TIME